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Friday, May 31, 2019

किसान इस प्रकार करें प्याज की खेती और बढाएं अपनी आमदनी

प्याज़ एक कंद वाली फ़सल है। बिना इसके सब्ज़ी फीकी सी लगती है। आप प्याज़ के बिना सलाद की कल्पना भी नही कर सकते हैं। वैज्ञानिक नाम allium cepa L. और एलिएसी कुल का यह पौधा हमारे दैनिक जीवन में बहुत काम का है। इसमें गुणसूत्रों की संख्या 16 पायी जाती है। वहीं प्याज की खेती का जन्म स्थान की बात करें तो उद्भव स्थान मध्य एशिया (अफगानिस्तान) जाना जाता है। Noida News
प्याज़ के बारे में ये भी जाने –
प्याज का तीखापन का कारण : एलाइल प्रोपाइल डाईसल्फाइड नामक पदार्थ के कारण,
प्याज में पीले रंग का कारण : क्वेरसीटीन के नामक
प्याज की खेती
वितरण व क्षेत्रफल –
हमारे देश देश भर में प्याज़ की खेती की जाती है। उत्तर प्रदेश,पंजाब,बिहार,महाराष्ट्र,तमिलनाडु व आंध्रप्रदेश में बहुतायत मात्रा में की जाती है।
उपयुक्त जलवायु
प्याज सूर्य के प्रकाश व तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील है। यह मुख्यतः एक शीतकालीन फसल है। आमतौर पर इसकी अच्छी बढ़वार के लिए आरम्भ 10 से 15 डिग्री सेल्सियस और कंदों के विकास के लिए 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तथा कंद निकालते समय 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान व 10 से 12 घंटे सूर्यप्रकाश की आवश्यकता होती है।
भूमि का चयन :
भारी भूमि को छोड़कर प्याज की दोमट मिटटी,बलुई दोमट में प्याज की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। भारी भूमि में प्याज के कंदों का पर्याप्त विकास नहीं हो पाता है। जिससे प्याज की पैदावार में बुरा प्रभाव पड़ता है।
भूमि व भूमि की तैयारी –
चूँकि प्याज एक उथली जड़ वाला पौधा है। अत : इसके लिए गहरी जुताई की आवश्यकता नही पडती। फिर भी देशी हल से 4 से 5 जुताई कर देना चाहिए। हर जुताई के बाद पाटा अवश्य चलाना चाहिए। जिससे ढेले टूटकर खेत भुरभुरा बन जाए, कार्बनिक खाद जैसे कम्पोस्ट, सड़ी गली गोबर की खाद भी खेत में डालना चाहिए। Read More

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